Brahmachari Dr. Girish Chandra Varma Ji Blog


तनाव से मुक्ति का एकमात्र उपाय भावातीत ध्यान है-ब्रह्मचारी गिरीश

तनाव से मुक्ति का एकमात्र उपाय भावातीत ध्यान है-ब्रह्मचारी गिरीश

तनाव से मुक्ति का एकमात्र उपाय भावातीत ध्यान है-ब्रह्मचारी गिरीश  12/04/2021 12:16:03 AM   तनाव से मुक्ति का एकमात्र उपाय भावातीत ध्यान है-ब्रह्मचारी गिरीश   Admin

"दिमाग एवं शरीर को तनाव से कैसे मुक्त करें" विषय पर 'महर्षि विश्व शांति आंदोलन' संस्था द्वारा आयोजित एक बेबीनार को संबोधित करते हुए महर्षि संस्थान के प्रमुख ब्रह्मचारी गिरीश जी ने विभिन्न प्रकार के तनावों को दूर करने के उपाय बताएं और इस दौरान दर्शकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का सकारात्मक रूप से समाधान भी किया !
महर्षि विद्या मंदिर विद्यालय समूह के अध्यक्ष एवं महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ब्रह्मचारी गिरीश जी ने लाइव सोशल नेटवर्किंग के माध्यम से दिमागी और शारीरिक तनाव के बारे में चर्चा करते हुए बताया कि व्यक्ति अपने जीवन में कई तरह की अपेक्षाएं पाल लेते हैं और यह अपेक्षाएं समय पर या कभी भी पूरी नहीं होने पर वह दिमागी तनाव से ग्रसित हो जाता है और इसका पूरा असर उसके शरीर पर भी पड़ता है... ब्रह्मचारी जी ने आगे बताया कि यदि हमारे सामने कोई बात चीत हो रही है और वह बात हमें पसंद नहीं है तो भी हमें तनाव हो जाता है। इसी प्रकार अक्सर असफल होने के भय से चिंताएं बढ़ जाती है और तनाव उत्पन्न होता है। छात्र परीक्षा के बाद परिणाम आने तक तनाव में रहता है, उसी प्रकार पूरे मानवीय जीवन में, व्यापार में, नौकरी में रुकावट आने पर भी तरह-तरह के तनाव उत्पन्न हो जाते है।
ब्रह्मचारी गिरीश जी ने उदाहरणार्थ बताया कि जब हम एक आम का वृक्ष लगाते हैं, और यदि 1 साल, 2 साल, या 3 साल बाद उसमें फल नहीं आते हैं तो हमें चिंता होने लगती है। परिवार में यदि किसी व्यक्ति की असमय मृत्यु हो जाती है अथवा पारिवारिक बिखराब हो जाता है तब भी तनाव उत्पन्न हो जाता है।
महर्षि जी ने बताया कि यह सभी कारण व्यक्ति के दिमाग पर नकारात्मक असर डालते हैं जिसका प्रभाव शारीरिक तनाव पर भी पड़ता है और व्यक्ति अस्वस्थ होता चला जाता है .. दिमाग में मानसिक तनाव का प्रभाव हमारे शरीर में बीमारी के रूप में परिलक्षित होता है।
उन्होंने बताया कि यदि हमें इन गंभीर तनाव से स्थाई रूप से निदान करना है तो इसके लिए हमें मुख्य रूप से भावातीत ध्यान को अपनाना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि प्राणायाम, ध्यान एवं योग भी लाभदायक है। इन सब में सबसे बड़ी प्रौद्योगिकी भावातीत ध्यान की है जो कि हमको महर्षि महेश योगी जी द्वारा प्रदान की गई है। इसलिए हमें सभी तरह के तनाव से मुक्ति पाने के लिए प्रतिदिन सुबह-शाम 20-20 मिनट का भावातीत ध्यान का अभ्यास अवश्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें मानसिक चेतना के स्तर पर जाकर तनाव से मुक्ति पाना है। नकारात्मकता को दूर करने में यह हमारी मदद करता है। ब्रह्मचारी जी ने यह भी कहा कि हमारे 'महा नेचर' कंपनी के कई स्वास्थ्य वर्धक आयुर्वेदिक उत्पाद जैसे महा ब्रह्म रसायन, वायरो पीस, स्ट्रेस पीस, फीवर पीस, इम्मुनो चैम्पियन, महा पेन रिलीफ आदि का उपयोग कर विभिन्न प्रकार की शारीरिक बीमारियों से निजात पाई जा सकती है ! इसलिए नियमित इनका सेवन करें और तनाव मुक्त जीवन जिए।
अपने उद्बोधन के पश्चात ब्रह्मचारी गिरीश जी ने वेबीनार में शामिल लोगों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों के जवाब देख कर उनका समाधान भी किया। एक पूछे गए प्रश्न का समाधान करते हुए उन्होंने कहा कि अपनी चेतना को सतोगुणी बना लेना ही सर्वोपरि उपाय है, यह समान रूप से चिकित्सा, कृषि एवं विज्ञान सभी क्षेत्रों में समान रूप से प्रभावी है। एक अन्य पूछे गए प्रश्न का समाधान करते हुए उन्होंने कहा कि आज कल बच्चे चार से लेकर 5 घंटे तक ऑनलाइन कक्षाओं की वजह से मोबाइल में व्यस्त हैं । उनके शरीर पर इसका दुष्प्रभाव पड़ रहा है एवं वह अनिद्रा के शिकार हो रहे हैं। इसलिए उन्हें भी नियमित भावातीत ध्यान का अभ्यास करना चाहिए क्योंकि 20 मिनट के भावातीत ध्यान से 8 घंटे सोने के बराबर ऊर्जा और आराम मिलता है। उन्होंने बच्चों को महा नेचर द्वारा उत्पादित आयुर्वेदिक उत्पाद महा ब्रेन सिरप के नियमित सेवन की भी सलाह दी।आज वैश्विक महामारी में बच्चों पर दबाव बढ़ गया है, इसको दूर करने के लिए क्या करना चाहिए? इस प्रश्न का समाधान करते हुए ब्रह्मचारी गिरीश जी ने कहा कि पहले सरकार कहती थी कि स्कूल में बच्चों को मोबाइल के उपयोग की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और इसका प्रत्येक स्कूल प्रबंधन अनुपालन करवाता था, किंतु आज 5- 5 घंटे बच्चों को ऑनलाइन कक्षाओं में समय गुजारना पड़ रहा है l बच्चे पूरी दुनिया का भविष्य है इसलिए उनके तनाव दूर करने के लिए हमें हर संभव प्रयास करना होगा l कोरोना काल से मन में बैठे डर से संबंधित पूछे गए एक अन्य प्रश्न का जवाब देते हुए ब्रह्मचारी ने बताया कि लॉकडाउन के 1 वर्ष के दौरान 1 दिन भी घर से बिना बाहर निकले मैं कार्य करता रहा, इसलिए लॉकडाउन के दौरान अपनी सक्रियता को कम नहीं करना चाहिए बल्कि अपनी क्षमताओं को और अधिक बढ़ाना चाहिए। यही संदेश हमें देना होगा। उन्होंने कहा कि डरने की आवश्यकता नहीं है, हम सभी भगवान के अंश हैं इसलिए हमारे साथ भगवान बुरा नहीं कर सकता ।
एक प्रश्न करता ने भावातीत ध्यान सीखने के लिए परिवार को कैसे प्रेरित करें ...के जवाब में ब्रह्मचारी ने कहा कि महर्षि विद्या मंदिर स्कूल की वेबसाइट पर प्रत्येक शहर के ध्यान शिक्षक का नाम एवं नंबर दिए हुए हैं, उनसे संपर्क करके भावातीत ध्यान का समुचित प्रशिक्षण प्राप्त किया जा सकता है। भावातीत ध्यान के लिए समय की प्रतिबद्धता क्या होनी चाहिए ? के बारे में पूछे गए प्रश्न का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि नाश्ते के पूर्व, दोपहर भोजन के पूर्व एवं रात्रि भोजन के पूर्व भावातीत ध्यान करने का समय सब से उपयुक्त होता है, किंतु कार्य की दशाओं को लेकर इसमें मामूली फेरबदल भी किया जा सकता है


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